एक ऐसा मंदिर जो श्री राम जी की सौतेली माँ ने मुहं दिखाई के रूप में दिया था

“कनक महल” एक प्रमुख हिन्दू मंदिर है जो अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर का नाम राजस्थान और बुंदेलखंड के सुंदर महलों के साथ जुड़ता है, और इसे एक विशाल महल के रूप में अभिकल्पित किया गया है। इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व “त्रेता युग” से जुड़ता है, जब इसे श्री राम जी की सौतेली माँ ने उनकी पत्नी सीता को मुहँ दिखाई के रूप में दिया था।

कौन हैं श्री राम जी की सौतेली माँ

श्री राम जी की तीन माँ थी. इनकी सगी मां का नाम कौशल्या था। इसके अलावा उनकी दो सौतेली मां और भी थी जिनका नाम सुमित्रा और कैकेई था. राम जी कैकेई माता के सबसे प्रिय पुत्र थे. कैकेई माता में श्री राम की पत्नी सीता माता की मुहं दिखाई पर कनक महल दिया था. कैकेई माता के कहने पर ही राम जी को 14 वर्ष का बनवाश हुआ था. इस बनवाश में माता सीता और छोटे भाई लक्ष्मण जी साथ गए थे.

इस मंदिर का इतिहास

कनक महल का इतिहास बहुत युगों तक पहुंचता है, जिसमें कई बार पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार हुआ है। पहला पुनर्निर्माण श्री राम जी के पुत्र कुश द्वारा “द्वापर युग” के प्रारंभिक काल में किया गया था। द्वापर युग के मध्य में राजा ऋषभ देव द्वारा भी मंदिर पुनः बनवाया गया, और श्रीकृष्ण ने कलियुग के पूर्व काल में इस स्थान पर यात्रा की थी।

निर्माण और पुनरोद्धार: कालान्तर में इस मंदिर को कई बार नष्ट होने का सामना करना पड़ा, लेकिन नवाब सालारजंग-द्वितीय गाज़ी द्वारा 1027 ई॰ में हुए नष्ट के बाद, इसका पुनरोद्धार ओरछा और बुंदेलखंड के महाराजा महाराजा श्री प्रताप सिंह जू देव और महारानी वृषभान कुंवारी द्वारा 1891 में किया गया।

मूर्तियाँ और स्थान

मंदिर में तीन जोड़ी मूर्तियाँ हैं, जो सभी भगवान राम और सीता की हैं। नवाब सालारजंग-द्वितीय गाज़ी द्वारा 1027 ई॰ में हुई नष्ट के बाद, महाराज विक्रमादित्य ने मंदिर के निर्माण के लिए नींव की खुदाई करवाई और उसे इन प्राचीन मूर्तियों से समृद्धि हुई। वर्तमान मंदिर में तीनों जोड़ियाँ गर्भ गृह में प्रतिष्ठित की गईं और यह एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में पूजा जाता है।

निष्कर्ष-

“कनक महल” एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, जिसमें सबसे पहले धार्मिक और सांस्कृतिक संदेशों की पूजा होती है। इसका स्थानीय और ऐतिहासिक महत्व हिन्दू धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यधिक है, और यह एक ऐसा स्थान है जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।

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