भगवान शिव तक अपनी मनोकामना पहुचाने के लिए नंदी के कान में क्या बोलना चाहिए?

जब भी आप किसी शिवालय में जाते है तो शिव के सामने नंदी मो बैठा देखा होगा. पर आपने कभी सोचा है नंदी जी शिव के सामने क्यों बैठे रहते है. और लोग उनके पास जाकर उनके काम में क्या कहते है. शिव की पूजा करने के बाद नंदी की पूजा करने का क्या कारण है.

हिन्दू मान्यताओ के अनुसार नंदी को शिव की सवारी कहा जाता है. नंदी शिव के प्रिय वाहक है. जब भी शिव अपनी तपस्या में लीन होते है तक नंदी जी उनके सामने बैठे रहते है. जब भी कोई भक्त उनके पास जाकर उनसे कुछ कहना चाहता है तो नंदी जी भक्त और शिव के बीच में आ जाते है. शिव तक अपनी मनोकामना पहुचाने के लिए शिव के वाहक नंदी जी से कहना पड़ता है.

नंदी जी का परिचय

शिवजी के प्रिय वाहन – नंदी

हिन्दू धर्म में भगवान शिव के भक्त वाहन नंदी की कहानी आध्यात्मिक रूप से भरी हुई है। नंदी की उत्पत्ति शिलाद ऋषि के जीवन से जुड़ी है. जिन्होंने भगवान शिव की उपासना करते हुए एक अमर पुत्र की प्राप्ति के लिए बड़ी कठिन तपस्या की थी।

शिलाद ऋषि के पितरों ने उनसे वंश को आगे बढ़ाने के लिए अमर पुत्र की प्राप्ति के लिए तपस्या करने का सुझाव दिया था। शिलाद ऋषि ने इस सुझाव को मानते हुए भगवान शिव की उपासना में लग गए और उन्होंने मृत्युहीन पुत्र का वर प्राप्त किया। इस पुत्र को नंदी के नाम से जाना जाता है।

नंदी जी ने अपना बचपन ऋषि के आश्रम में बिताया. एक दिन, मित्रा और वरुण नामक मुनि ऋषि के आश्रम में आए और उन्होंने नंदी की अल्पायु होने की बात की। ऋषि बहुत दुखी हुए और उन्होंने नंदी से भगवान शिव की आराधना करने के लिए कहा। इस पर भगवान शिव ने उत्तर दिया, “तुम मेरे वरदान से उत्पन्न हुए हो, इसलिए तुम्हें मृत्यु से कोई भय नहीं है। अब तुम मेरे प्रिय वाहन होंगे।”

नंदी भगवान शिव के चरणों में सदैव रहते हैं और उनके वाहन के रूप में कार्य करते हैं। वे शिव भगवान के साथ रहकर उनकी सेवा करते हैं और भक्तों की मनोकामना को भी उनके पास पहुँचने में सहायक होते हैं। नंदी को भगवान शिव के वाहन के रूप में उपासना किया जाता है और उन्हें शिव भक्तों के बीच एक महत्वपूर्ण स्थान है।

नंदी पूजा मंत्र- ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, नन्दिकेश्वराय धीमहि, तन्नो वृषभरू प्रचोदयात्।।

नंदी के नाम

नंदी, हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पूज्य गाय है, जिसे नंदिकेश्वर भी कहा जाता है। यह गाय भगवान शिव के वाहन के रूप में पूजी जाती है और उसका पूजन हिंदू मंदिरों में व्यापक रूप से किया जाता है। नंदी का परिचय हिंदू साहित्य और पौराणिक कथाओं में बहुत रूप से दिया गया है।

नंदी को नंदिकेश्वर, वृषभ, बसुकी, जयंत, वृषभानु, वृषभाध्वज, वृषभाक्ष, गोकर्ण, वीरभद्र, वीरबल, गोवत्स, गोपति, गोपाल, गोरक्षक, शरभ, शृङ्गी, वृषभारूढ़, नन्दीश, गोप, वृषभाकर, वृषभासुर, वृषभावाहन, गोवत्सद्वय, गोपालक, गोपानन्दन, गोपशार्दूल, गोगणपति, गोराज, गोकुलपाल, गोपीप्रिय, गोविन्द, गोगोप, गोचर, गोकुलाचल, गोलोकवासी, गोग्रीव, गोपकन्यासुत आदि नाम से भी जाना जाता है.

नंदी जी के कान में क्या बोला जाता है?

नंदी जी को शिव भगवान के परम भक्त कहा जाता है. नंदी जी के कानों की बात करें तो हिन्दू पौराणिक कथाओं में कहा जाता है कि नंदी जी के कानों में भगवान शिव तक अपनी मनोकामना पहुचाने की क्षमता होती हैं। अगर आपकी मनोकामना शिव तक नहीं पहुच रही है तो सोमबार वाले दिन “ॐ नमः शिवाय” का जाप करके नंदी जी के कान में अपनी मनोकामना को कहे.

नंदी के कान में कहने के कुछ नियम

  1. नंदी के कान में अपनी मनोकामना बोलते समय इस बात का ध्यान रखें कि आपकी कही हुई बात कोई औऱ न सुनें। अपनी बात इतनी धीमें कहें कि आपके पास खड़े व्यक्ति को भी उस बात का पता ना लगे।
  2. नंदी के कान में अपनी बात कहते समय अपने होंठों को अपने दोनों हाथों से ढंक लें ताकि कोई दूसरा व्यक्ति उस बात को कहते हुए आपको ना देखें।
  3. नंदी के कान में अपनी मनोकामना कहने से पहले नंदी का पूजन करें और मनोकामना कहने के बाद नंदी के समीप कुछ भेंट अवश्य रखें। यह भेंट धन या फलों के रूप में हो सकती है।
  4. नंदी के कान में कभी भी किसी दूसरे की बुराई, दूसरे व्यक्ति का बुरा करने की बात ना कहें, वरना शिवजी के क्रोध का भागी बनना पड़ेगा।
  5. अपनी बात नंदी के किसी भी कान में कही जा सकती है लेकिन बाएं कान में कहने को अधिक महत्व है।

नंदी के कान में कहने का मुख्य कारण

भगवान शिव हमेशा समाधिस्थ रहते है,और बंद आंखों से सम्पूर्ण जगत का संचालन करते है तो नन्दी उनके लिए चैतन्य रूप का कार्य करते है वो उनकी समाधि के बाहर बैठे रहते है,जिससे उनकी समाधि में विघ्न न हो तो भक्त अपनी मनोकामना या समस्या नंदी जी के कान में कह देते है , माना जाता है उनके कान में कही गयी बात शिवजी तक पहुच जाती है और उस भक्त की समस्या का समाधान या मनोकामना पूर्ति शीघ्रातिशीघ्र हो जाती है।

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